Saturday, 1 May 2021

फारबिसगंज विधायक पुत्र के विवाह में कोविड गाइडलाइंस की धज्जी उड़ाई गई

अररिया जिला प्रशासन का हैरतअंगेज कारनामा विचित्र चेहरा फिर सामने आया है
फारबिसगंज विधायक पुत्र के विवाह की तस्वीर

सिर्फ 400 किलोमीटर दूर घर(चंपारण) है वधुपक्ष का जिसपर फारबिसगंज थाने ने FIR दर्ज किया है !!

चूंकि यह विवाह जो फ़ारबिसगंज में आयोजित था इसकी तस्वीरें वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तो फारबिसगंज थाने ने मुकदमा दर्ज करने की औपचारिकता निभाई / पर फारबिसगंज पुलिस ने घोर निंदनीय भूमिका निभाई 
लड़की वाले चंपारण से 15 लोग आए थे क्योंकि शादी की तारीख तय थी/ चूंकि लड़की के पिता चंपारण के विधायक नहीं थे इसीलिए उन्हें लगा होगा कि चंपारण में समारोह पूर्वक शादी नहीं हो पाएगी जबकि लड़के के पिता BJP विधायक हैं यहां दिक्कत नहीं आएगी मुझे लगता है इसलिए शादी की व्यवस्था फारबिसगंज में तय की गई होगी औऱ विवाह फारबिसगंज के एक धर्मशाला में संपन्न हुई / जहाँ से सिर्फ 400 मीटर दूर वरपक्ष का घर है जिस पर FIR होना चाहिए था नहीं हुआ /क्योंकि लड़के के पिता फारबिसगंज विधानसभा से भाजपा विधायक हैं 
इसलिए सिर्फ वधु पक्ष के लोगों पर एवं धर्मशाला संचालक पर मुकदमा दर्ज किया गया

मने फारबिसगंज पुलिस का मानना है कि चंपारण से आए 16 लोग महामारी फैला रहे थे औऱ विधायक जी के जो फारबिसगंज अररिया से जुटाए 2970 लोग थे वो तो कीटाणु मार रहे थे 🤔

Monday, 12 April 2021

वो लोग कौन हैं जिसने देश का मॉब लिंचिंग से परिचय करवाया था

किशनगंज टाउन थाना अध्यक्ष इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार बिहार से सटे पश्चिम बंगाल में किसी मामले के छापेमारी के लिए पहुंचे थे जहाँ वो #MobLynching मतलब उग्र भीड़ का शिकार हो गए

इस हृदयविदारक घटना की जानकारी से हम सभी लोग स्तब्ध अचंभित हैं ; यह अमानवीय कुकृत्य है हम इसकी भर्त्सना करते हैं शहीद को अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं 😢😢🇮🇳🙏

          शहीद इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार की फाइल फोटो 


एवं मृतक के आत्मशांति सदगति ,  परिजनों के लिए अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से आपके लिए इस विपत्ति को झेलने की शक्ति साहस औऱ धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना करते 



ऐसे हर कुकृत्य की भर्त्सना निंदा होनी चाहिए औऱ दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए पर विचार किया जाना चाहिए की आखिर मॉब लिंचिंग “Mobe Lynching” शब्द से देश को किन लोगों ने साक्षात्कार करवाया इस पर भी चिंता होनी चाहिए

वैसे कुछ तेगले टाइप के लोग सबसे पहले जिस राज्य में जुर्म हुआ है उस राज्य में सरकार किसकी है यह देखकर निंदा करते हैं उन्हें इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह नहीं दिखते क्योंकि वो उत्तरप्रदेश में हुआ था जहाँ हिंदुओं के स्वयंघोषित भगवान योगी की सरकार है 

पर अपने को ऐसे हर घटना से नफरत है चाहे वो वीरगति पाने वाले शहीद इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार हो या फिर onduty शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह (उत्तर प्रदेश) की हत्या हो 

#MeriBaat #JoBaatHai #jansanvaad #JaiHind

Sunday, 11 April 2021

बड़ा हादसा मुंगेर में गंगा नदी में नाव पलटी

मुंगेर 👉 गंगा नदी में अत्यधिक वजन के कारण नाव पलट गई 

Jan Sanvaad


परिणाम हुआ कि नाव पलट गई नाव पलटने के बाद उनमें से कुछ लोग ही तैर कर बाहर निकल गए / दुर्घटना में 35- 40 लोगों के लापता होने की खबर आ रही है / वैसे तो अबतक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है पर प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार संख्या कमोबेश तीन दर्जन से अधिक थी /नाव तारापुर दियारा घाट से बरदह घाट के लिए चला था और बीच गंगा में डूब गया





दरभंगा -कोरोना से मौत के बाद हंगामा तोड़फोड़,DMCH के कोरोना आइसोलेशन वार्ड में तोड़फोड़ हंगामा, शहर के 30 वर्षीय युवक की मौत के बाद परिजनों ने किया हंगामा, डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगा किया हंगामा, नर्स और स्टाफ ने वार्ड में छुप कर बचाई अपनी जान





पटनासिटी :--मधुबनी नरसंघार के विरोध में करनी सेना के समर्थकों ने बिहटा सिक्स लेन को जाम कर आगजनी किया ।


Friday, 9 April 2021

बार बार बदलते यार विचार से अपने फंदे में ही फँस गए नीतीश कुमार

 कहानी तब की जब महागठबंधन से पलटा मारने को तैयार हो रहे थे नीतीश कुमार


नीतीश कुमार ने हमेशा दूसरों की बैसाखी पर की है। दो सर्वथा मुख़्तलिफ़ विचारधाराओं, सिद्धांतों और नीतियों वाली पार्टियों के साथ गठबंधन में रहकर गठबंधन धर्म को धता बताते रहे हैं।

नीतीश कुमार भलीभाँति पहचान रहे हैं कि विकास का तथाकथित ‘क़रार’ अब ‘तक़रार’ बन गया है। विश्वसनीयता ज़ीरो हो गयी है। वोट बैंक छिटक गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव परिपक्व होकर जनमानस में स्वीकार्यता प्राप्त कर जमीनी स्तर पर गंभीर चुनौती दे रहे हैं। स्वजातीय वोट छोड़ सब वोट बिखरकर दूसरी पार्टियों में बँटने की प्रबल आशंका है, तो एक बार पुनः पूर्व में इन्हें राजनीतिक रूप से ज़िंदा करने वाले महागठबंधन की याद सताने लगी है
अक्सर नीतीश कुमार 1985 में हमने विधायक बनाया का राग अलापते हैं जबकि यह तस्वीर हकीकत बात रही

आप माले, भाजपा, सीपीआई, राजद, कांग्रेस, लोजपा, हम(से) आप से लेकर रालोसपा तक सभी के साथ गठबंधन में रहे हैं 
और हमेशा तोड़ फोड़ की कोशिश में कांग्रेस कैसे भूलेगी कि महागठबंधन से निकलने के बाद किस प्रकार नीतीश कुमार ने कांग्रेस विधायक दल को तोड़ने की असफल कोशिश थी। यहाँ तक कि उनके तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष समेत चार एमएलसी कांग्रेस छोड़ जदयू में शामिल कर लिए गए



1990 में मंडल कमीशन के लागू होने और 1992 में बाबरी विध्वंस के उपरांत देश में मंडलवादी और धर्मनिरपेक्ष राजनीति का उफान अपने चरम पर था. राष्ट्रीय पटल पर बीजेपी अलग-थलग पड़ चुकी थी और दुसरे दूसरे दलों के लिए राजनीतिक रूप से लगभग अछूत सी बन चुकी थी।

इसी दौर में राजनीतिक रूप से अस्पृश्य बन चुकी भाजपा के लिए तत्कालीन समता पार्टी के नेता नीतीश कुमार संजीवनी लेकर प्रकट हुए। दिसंबर 1995 में भाजपा के मुंबई में आयोजित विशेष अधिवेशन में नीतीश कुमार ने भाजपा के मंच से यह कहकर सबको चौंका दिया, ”मुझे महसूस हो रहा है कि मैं घर आ गया हूँ”। नीतीश कुमार ने मंडल की काट में कमंडल पकड़े, बाबरी मस्जिद ढहाने वाली सांप्रदायिक पार्टी और मंडल कमीशन के खिलाफ के दल को अपना घर बताकर 1996 के आम चुनाव के पूर्व BJP संग गठबंधन कर लिया। समाजवादी राजनीति करने वाले जॉर्ज फ़र्नांडीस और शरद यादव को साथ लेकर नीतीश कुमार ने मंडल विरोधी भाजपा को उसके सबसे मुश्किल हालात में अत्यावश्यक ‘समाजवादी प्रमाण पत्र’ सौंप दिया



2010 में नीतीश-भाजपा गठबंधन ने बिहार में ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त किया। इस बार चुनाव में उनकी सीट बीजेपी से ज़्यादा आई
 17 साल बीजेपी की बैसाखी पर लालू विरोधी राजनीति करने वाले नीतीश कुमार ने जून 2013 में मौक़ा देख उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी समेत सभी भाजपाई मंत्रियों को इसलिए बर्ख़ास्त कर दिया क्योंकि नरेंद्र मोदी के बरक़्स वो एक महान सेक्युलर विकल्प के रूप में स्वयं को देखना चाहते थे। हालांकि राजनीति का अपना व्याकरण होता है और मौकापरस्ती अवाम को सबसे पहले समझ में आती है अतः 2014 का लोकसभा चुनाव सीपीआई के साथ मिलकर लड़ने के बाद मात्र 2 सीट जीत कर उन्हें अपने सपने की अकाल मृत्यु का अहसास हो गया.

2015 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने धुर विरोधी लेकिन पुराने मेंटर लालू प्रसाद और कांग्रेस के महागठबंधन में  शामिल होकर दूसरे नंबर की पार्टी होने के बावजूद मुख्यमंत्री बने। लालू प्रसाद ने कहा था कि गंगा-जमुनी तहज़ीब,संविधान बचाने और देशहित में वो ज़हर पीने के लिए तैयार हैं। इसलिए ही उन्होंने तमाम कटुता भुलाकर चंद रोज़ पहले पार्टी तोड़ने की कोशिश करने वाले नीतीश कुमार को न सिर्फ़ साथ मिलाया, बल्कि प्रचार में उतरने से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित किया





फिर अचानक 18 महीने बाद सुशासन बाबू की अंतरात्मा जगी और काल्पनिक भ्रष्टाचारी ढाल बना कर घर वापसी कर बैठे।

26 जुलाई 2017 को राजनीतिक मूल्यों का चीरहरण , सामाजिक प्रतिबद्धता का क़त्ल एवं जनादेश का अपमान करने के बाद उन्हें गठबंधन का सबसे बड़ा सहयोगी दल भ्रष्टाचारी दिखने लगा। गठबंधन तोड़ने से पहले उन्होंने साज़िशन एक सोची-समझी रणनीति के तहत फ़ील्डिंग सजानी शुरू की। इसी कुटिल रणनीति के तहत उन्होंने पुराने भाजपाई मित्रों से विमर्श के बाद भाजपा को फ़ायदा पहुँचाने और कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के वोट काटने के लिए दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ा ही नहीं, बल्कि ख़ुद निगम चुनावों में प्रचार भी किया।
फिर से पटकथा के बदलने का दौर आ गया है, महागठबंधन में रहते नोटबंदी का समर्थन करने वाले वे पहले विपक्षी नेता थे

राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद का समर्थन करने वाले वे पहले विपक्षी मुख्यमंत्री थे। एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार के समर्थन के पीछे बहाना यह बनाया कि वो बिहार के राज्यपाल हैं, लेकिन बाबू जगजीवन राम की सुपुत्री, बिहार की बेटी पूर्व लोकसभा अध्यक्षा मीरा कुमार की दावेदारी यह कह  ख़ारिज कर दी कि कांग्रेस उन्हें हराने के लिए चुनाव लड़ा रही है। लालू प्रसाद ने सार्वजनिक रूप से अनेक बार नीतीश कुमार से इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था नहीं मानने पर यहाँ तक कह दिया था, “नीतीश कुमार ऐतिहासिक भूल करने जा रहे हैं, मत करिए यह ब्लंडर” 

आज लालू प्रसाद की बात सत्य साबित होती प्रतीत हो रही है।







फारबिसगंज विधायक पुत्र के विवाह में कोविड गाइडलाइंस की धज्जी उड़ाई गई

अररिया जिला प्रशासन का हैरतअंगेज कारनामा विचित्र चेहरा फिर सामने आया है फारबिसगंज विधायक पुत्र के विवाह की तस्वीर सिर्फ 400 किलो...